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Administrator Dr. Srimati Tara Singh









कुछ ज्यादा ही भले दिखाई देते हो

 

 

कुछ ज्यादा ही भले दिखाई देते हो।
माँग रहे हैं अन्न मिठाई देते हो।

 

लगता है कुछ बड़ा जुर्म कर आये हो,
बिन माँगे किसलिये सफाई देते हो।

 

तुम सफेदपोशों से घबराते हैं हम,
उँगली थाम, मरोड़ कलाई देते हो।

 

हमने ऐसा नया आज क्या कर डाला,
मन में क्या कुछ सोच बधाई देते हो।

 

किस मुँह से खैरात माँगने आये हो,
लाकर हमको कौन कमाई देते हो।

 

जिन रिश्तों को दीमक कब का चाट चुका,
उन रिश्तों की आज दुहाई देते हो।

 


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-गौरव शुक्ल
मन्योरा

 

 

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