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चाहे कही भी तुम रहो

 

 

चाहे कही भी तुम रहो

तुमको ना हम भूल पाएंगे

किए थे जो वादे हमने साथ मै

तेरे जाने के बाद भी वो हम निभाएंगे

तुम जो किया करते थे इंतज़ार हमारा

इंतज़ार हम भी करते जाएंगे

लौटकर जो आओगे नहीं तुम यहा

हम फिर भी तेरी राह मै तुझे नजर आएंगे

होती नहीं मोहब्बत यहा बार बार

एक तुझी से ये रिस्ता हम निभाएंगे

चाहे तुम कही भी रहो

तुमको ना भूल पाएंगे

चलते थे जिस राह हम ,

वो घर , वो गली ,वो शहर

एक दिन सब यही हम छोड़ जाएँगे

एक तुमको हम ना भूल पाएंगे

अपनी तो अब दिन रात एक बात हो गयी

देखा था तुमको बरसो पहले पर लगता है कल की बात हो गयी

सोचा था सब कुछ होगा एक दिन

घर था अपना मिट्टी का ओर बरसात हो गयी

तेरे जाने के बाद भी हम करते रहे सजदा तेरा

होकर हम अमीर भी , फकीरो की तरह हो गए

कितने थे पास हम , आज देखो कितने दूर हो गए

होकर भी सारे सपने सच , टूटकर वो चूर हो गए

चाहे तुम कही भी रहो

तुमको ना भूल पाएंगे

एक जो घर था तेरा , यादों का था जो बसेरा

वक़्त के साथ हुआ वो भी अब गैरो का सवेरा

मै एक मिट्टी का था पुतला

वक़्त के साथ धीरे धीरे खंडर होता गया

मै था जो आज तेरा , धीरे धीरे कल होता गया

कितना था उजाला यहा , धीरे धीरे वो अंधेरा होता गया

चाहे तुम कही भी रहो

तुमको ना भूल पाएंगे

एक इश्क़ था तुझ से , तुझी से ताउम्र इश्क़ निभाएंगे

कहते है लोग जिसको मोहब्बत , वही किस्से किताबों मै छोड़ जाएंगे

चाहे तुम कही भी रहो

तुमको ना भूल पाएंगे

 

 

अजनबी राजा

 

 

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