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Administrator Dr. Srimati Tara Singh









बहुत दिन तक कोई चेहरा मुझे अच्छा नहीं लगता

 

 

बहुत दिन तक कोई चेहरा मुझे अच्छा नहीं लगता
मताये दीद पर क़ब्ज़ा मुझे अच्छा नहीं लगता

 

कनीज़ों पर भी आ सकता है दिल ज़िल्ले इलाही का
निज़ामे इश्क़ में शजरा मुझे अच्छा नहीं लगता

 

मैं कुछ भी सोच सकता हूँ मैं कुछ भी देख सकता हूँ
ख्यालो ख्वाब पे पहरा मुझे अच्छा नहीं लगता

 

ना खिड़की है ना आँगन है ना रोशन दान है कोई
इमारत साज़ यह नक़्शा मुझे अच्छा नहीं लगता

 

जो होती हाथ में मेरे तो दुनिया बाँट देता मैं
किसी के हाथ में कासा मुझे अच्छा नहीं लगता।


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हाशिम रज़ा जलालपुरी

 

 

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