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Administrator Dr. Srimati Tara Singh









चराग़ और हवाओं के दरम्यान हूँ मैं

 

चराग़ और हवाओं के दरम्यान हूँ मैं
ये जानता हूँ की दोनों का इम्तिहान हूँ मैं


बिछड़ते वक़्त वो कह के निकल गई इतना
तेरी तो जान हूँ पर अपने घर की शान हूँ मैं


उगलती रहती हूँ हीरे मैं कोख से अक्सर
शिनाख्त मेरी की इक कोयले की खान हूँ मैं


ज़रूरतों ने मुझे क्या से क्या बना डाला
कभी था तीर के जैसा तो अब कमान हूँ मैं


उठा रहा हूँ अभी बोझ अपने घर-भर का
सफ़ेद बाल हैं लेकिन अभी जवान हूँ मैं


मुझ ही को पढ़ते हैं मुझपे अमल नहीं करते
रटा-रटाया हुआ बाइबल कुरआन हूँ मैं


बहाए आंसू मेरा घर जल के जिस दिन से
ऐ दुनिया तुझसे उसी दिन से बाद-गुमान हूँ मैं


ये बात कब्र में आ के पता चली 'फ़ानी'
की अपने फ़ेलों पे किस दर्जा बेजुबान हूँ मैं

 


फ़ानी जोधपुरी

 

 

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