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Administrator Dr. Srimati Tara Singh









कोई दरख़्त घनैरा तलाश करता हूँ

 

 

कोई दरख़्त घनैरा तलाश करता हूँ
सुलगती धूप में साया तलाश करता हूँ

 

जो दिल के साथ मेरी रूह को भी महका दे
कोई गुलाब सा चेहरा तलाश करता हूँ

 

जहाँ पे सर ही नहीं दिल भी सब के झुक जाएँ
मोहब्बतों का वो काबा तलाश करता हूँ

 

मैं अपनी पलकों पे शमये वफ़ा जलाये हुए
मरीज़े ग़म हूँ मसीहा तलाश करता हूँ

 

जो मुझ पे रखता है इलज़ाम बेवफाई का
उसी से दर्द का रिश्ता तलाश करता हूँ

 

रज़ा मैं डूब के इल्मो हुनर के दरिया में
मैं कोहे नूर का हीरा तलाश करता हूँ।

 

 

हाशिम रज़ा जलालपुरी

 

 

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