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Administrator Dr. Srimati Tara Singh









दिलासा ही दिलाया जा रहा है

 

 

दिलासा ही दिलाया जा रहा है
अभी भी आज़माया जा रहा है

 

यक़ीनन ग़म छुपाया जा रहा है
जो इतना मुस्कुराया जा रहा है

 

जो सदियों से दबे कुचले गए हैं
उन्हें ही फिर सताया जा रहा है

 

कोई मतलब रहा होगा यक़ीनन
तभी मक्खन लगाया जा रहा है

 

है जिनकी प्यास कतरे भर की जितनी
उन्हें सागर पिलाया जा रहा है

 

यक़ीनन रास्ता निकलेगा कोई
दिवारों को गिराया जा रहा है

 

चुनावी दौर के जुमलों से बचना
फ़क़त सपना दिखाया जा रहा है

 

रदीफ़-ओ-काफ़िया के गुर सिखाकर
हमें शायर बनाया जा रहा है

 

रखो ये याद, उतना ही उठेंगे
हमें जितना दबाया जा रहा है

 

कहीं पर कोयले की लूट है तो
कहीं चारा ही खाया जा रहा है

 

 

माही (महेश कुमार कुलदीप)

 

 

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