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Administrator Dr. Srimati Tara Singh









आपकी आमद से दिल में चराग जलने लगे

 

 

 

आपकी आमद से दिल में चराग जलने लगे,
मुरझाये चमन में भी गुलाब खिलने लगे,


सालों के मानिंद गुजर रही थी हर घड़ी ,
अब तो वक़्त के भी पर निकलने लगे,


तीरगी फैली हुयी थी स्याह रात की,
बनके सूरज तुम फलक पर आने लगे,


होने लगा है हर तरफ मंजर सहर का ,
दरख्तों पर परिंदे चहचहाने लगे,


ऐ खुदा, शुक्रिया तेरी नवाजिशों का,
दिलवर के अब मुझे दीदार होने लगे,

 

 

 

Chitra Kumar Gupta

 

 

 

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