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Administrator Dr. Srimati Tara Singh









दो बच्चों के बीच में तन्हा लेटा हूँ

 

"दो बच्चों के बीच में तन्हा लेटा हूँ
ऐ सरहद मैं कुछ-कुछ तेरे जैसा हूँ


आधा-आधा मैं उनका पर मेरा कौन
जो भी जागे उसको थपकी देता हूँ


उसकी हमदर्दी अब पीछे छूट चुकी
अब मैं हर मंजिल पे तन्हा बैठा हूँ


थक के चूर हो चाँद चलो आराम करो
सूरज को आवाज़ लगाये देता हूँ


अल्लाह हू-अल्लाह हू जब भी जपता हूँ
नानक की बानी को तब-तब जीता हूँ


बढ़ते रहना आदत है अपनी 'फ़ानी'
बंजारों का चलता-फिरता डेरा हूँ

 


फ़ानी जोधपुरी "

 

 

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