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Administrator Dr. Srimati Tara Singh









इश्क एक फरेबी चाल

 

 

लोग कहते हैं कि कहने दो
आँख के दरिया को बहने दो

 

अब मिला आँखे हमीं से सुन
शक्ल सीने में उतरने दो

 

होश में आने कि जल्दी क्यों?
और थोड़ी यूँ गुजरने दो..

 

बन गया हूँ हूबहू शीशा
मौत से ही अब लिपटने दो

 

क्यों मरे हम मोहिनी पर ही
भूल को अब बस सुधरने दो

 

भूलना भी है कठिन तुझको
पर ज़रा कोशिश तो करने दो

 

उफ़ जहां की उलझने 'तेजस'
प्यार को पन्नों में रहने दो

 

 

 

©प्रणव मिश्र'तेजस'

 

 

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