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Administrator Dr. Srimati Tara Singh









*गज़ब हो

 

 

तेरी आंखों का नशा रग-रग में उतर जाये तो गज़ब हो,
तू उम्र भर को मेरे पहलू में ठहर जाये तो गज़ब हो l


एक मुद्दत से तू पत्थर का खुदा बन के फिरा है,
मेरी बाहों में कभी आके बिखर जाये तो गज़ब हो l


तुझको माना है खुदा मैने तेरी इबादत की है,
मेरे जज़्बात तक तेरी भी नज़र जाये तो गज़ब हो l

 

जैसे दो पल के तेरे दीदार से संवरे हैं मेरे दिन,
कुछ यूं ही ये सारी उम्र संवर जाये तो गज़ब हो l

 

मैं घड़ी- हर- घड़ी ये सोचता रहता हूं कि,
तुम हो आगोश में और उम्र गुज़र जाये तो गज़ब हो l

 

तेरे अन्दर तो सौ-सौ तूफ़ान उठा करते हैं "सागर",
उस तक भी कोई एक लहर जाये तो गज़ब हो ll

 

 

-Er Anand Sagar Pandey

 

 

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