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Administrator Dr. Srimati Tara Singh









हम्द

 

 

खुदा ने उगते सूरज में बला की रौशनी रख दी
सितारों को चमक दी, चाँद में ताबिंदगी रख दी

 

खुदा ने कारवाने ज़िन्दगी आगे बढ़ाने को
रखी पत्तों में हरियाली, हवा में ताज़गी रख दी

 

अनादिल को सिखाया ज़मज़मा ख्वानी का फन उस ने
मगर गुलशन में फूलों की ज़बाँ पर ख़ामुशी रख दी

 

लचकने का सलीक़ा भी दिया गुलबार शाखों को
छुपा कर नर्म मिट्टी में शजर की ज़िन्दगी रख दी

 

यह दिल इंसाँ के सीने में कहीं पत्थर ना हो जाएँ
खुदा ने इसलिए आँखों में अश्कों की नमी रख दी

 

रज़ा जिस जिस ने जो माँगा खुदा ने दे दिया उसको
मेरी तखईल के कासे में उस ने शायेरी रख दी।

 

 

हाशिम रज़ा जलालपुरी

 

 

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