tarasingh
Administrator Dr. Srimati Tara Singh









मेरा भी कम हसीन मुकद्दर नहीं लगता

 

 

मेरा भी कम हसीन मुकद्दर नहीं लगता,
तू मिल गई तो अब सफर सफर नहीं लगता।

 

तू साथ होती है तो साथ क्या नहीं होता,
तू दूर होती है तो घर भी घर नहीं लगता।

 

आदत बिगाड़ दी है तेरे करवाचौथ ने,
महबूब मेरे! मरने से अब डर नहीं लगता।

 

दुनिया में नहीं है तेरे जवाब का कोई,
कोई भी चेहरा तुझसे अब बेहतर नहीं लगता।

 

वो नोकझोंक, वो बहस , वो नुक्ताचीनियाँ,
गुस्से में भी तू प्यारा कम मगर नहीं लगता।

 

जब तू मेरे आगोश में आती है प्यार से,
जन्नत में और जमीन में अंतर नहीं लगता।

 

'गौरव' तेरा कलाम भी क्या लाजवाब है,
वैसे तो देखने से तू शायर नहीं लगता।

 

 


---------
-गौरव शुक्ल
मन्योरा

 

 

HTML Comment Box is loading comments...