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Administrator Dr. Srimati Tara Singh









हंसता है

 

 

दुनिया पागल पे ओ पागल दुनिया पे हंसता है।
मैं ठहरा आशिक, फिरभी सब मुझपर हंसता है।

 

उसने ऐसे आगोश में लिया मुझे जैसे
चांदनी में बादल चांद को ढक हंसता है।

 

बद्दुआ भी दुआ बनती है बुजुर्ग कहते है
घर उनका भी बसेगा, जिसपे जग हंसता है।

 

अजीब है, कोई सबकुछ पाकर भी खुश नहीं
कोई सबकुछ खोकर भी हंसता है।

 

उनकी वफाओ की हमने ढेरों कसमें खाए
अब दोस्त और मेरा दिल, दोनो मुझपे हंसता है।

 

तडपता रहा, करवट दर करवट नींद को
पूछा चांद से तो मेरी बेबसी पर हंसता है।

 

डरता है 'अमीत' वक्त की गुस्ताखियो से
कोई हसीं जब मुझे देख कर हंसता है।

 

Amit Rajan

 

 

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