tarasingh
Administrator Dr. Srimati Tara Singh









हे शारदे माँ

 

 

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ज्योति मन की दे जगा माँ शारदे
ग्यान प्रकाश से सजा माँ शारदे
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पाप द्वेष की आँधी को मिटा दे
प्रेम का दीप दे जला माँ शारदे
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आए सरस्वती माँ सबके द्वार पे
सूनी कोख को दे भरा माँ शारदे
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धारण करे पीत परिधान सभी जन
प्यार के बौरों को उगा माँ शारदे
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फूल सरसों के खिले हर द्वारे
रास्ता कोई दो दिखा माँ शारदे
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आज मुझ को दे एक वरदान माँ
राह से न कभी दे डिगा माँ शारदे
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ताप मन का मेरा हो जाए दूर माँ
कोई ऐसी मुझे दे हवा माँ शारदे
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तू सुरों की देवी वीणापाणिनी माँ
वाद्य को सुरों से दे भरा माँ शारदे
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आ गयी दिलों में कटुता सभी के
दूर हो ,ओषधि दे दिला माँ शारदे
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पालते है अँधेरे हम अपने ही लिए
दूर हो जाए सूरज दे बुला माँ शारदे
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पकड़ ना चले उँगली एक दूसरे की
सभी मे विश्वास दे जगा माँ शारदे
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बात को हर सच्चा सच्चा मैं लिखूँ
लेखनी कोई मुझे दे मँगा माँ �शारदे
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डॉ मधु त्रिवेदी

 

 

 

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