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Administrator Dr. Srimati Tara Singh









होंठोंने चुप रहना सीखा

 

 

होंठोंने चुप रहना सीखा
और आखों ने कहना सीखा...


खुशबू लेते रहे फुलों से
संग हवाके बहना सीखा...


मां की तरहा मुस्कूराकर
चुप रहकर सब सहना सीखा...

 


iiii***किशोर मुगल***iiii

 

 

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