tarasingh
Administrator Dr. Srimati Tara Singh









इकरार ना सही पर बात ना हो इंकार की !

 

 

इकरार ना सही पर बात ना हो इंकार की !
चले भी आओ इंतिहा है अब इंतजार की //

 

किस्मत ने लिखे हैं लकीरों में कई हादसे ,
अनदेखा करता रहा गहराईयॉ मझधार की //

 

अपना समझ जिनके लिये तडपा रात भर,
वही बोलियॉ लगाते मिले पैसे से प्यार की //

 

मतलब से ही मिलते हैं लोग अक्सर जहान में ,
सूरत कहॉ मिलती है अपनों में एतबार की //

 

पढ तो लेते है वो होंठों की कपकपाहट भी ,
महसूस भी करते धडकन दिले बेकरार की //

 

अपनी ही मैयत पर फूल चढाता रहा "अमित" ,
ऐसी सजा दुश्मन को भी ना मिले प्यार की //

 


❤अमित समैया ( गोलू)❤

 

 

HTML Comment Box is loading comments...