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Administrator Dr. Srimati Tara Singh









जिंदगी से जा चुके हैं आप

 

"जिंदगी से जा चुके हैं आप, पर;
गीत गाता आपके दिल, रात भर।

 

हाँ, सुनो, किस्सा हमारा भी सुनो;
हाथ में दिल थाम लो पहले मगर।

 

क्यों हमारी आँख नम होने लगी,
आ गया नजदीक क्या उसका शहर?

 

कौन आखिर यह अजब सा मर्ज है;
नींद बस आती नहीं आठों पहर।

 

दो कदम की है मुझे ख्वाहिश नहीं,
साथ दो, ताउम्र दे पाओ अगर।"

 


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-गौरव शुक्ल
मन्योरा

 

 

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