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Administrator Dr. Srimati Tara Singh









जीवन को क्यूँ फिर से आधा छोड़ चले

 

human soul

 

जीवन को क्यूँ फिर से आधा छोड़ चले,
चमकीले कागज़ को सादा छोड़ चले।

 

जो करते थे साथ निभाने की बातें,
वो हरजाई अपना वादा छोड़ चले।

 

ये कलियुग है पल में कुछ भी हो जाये,
कृष्णा को कब उसकी राधा छोड़ चले?

 

रुख़्सत हम सबको दुनिया से होना है,
ऐसे जैसे बाबा-दादा छोड़ चले।

 

दुनिया की सच्चाई सब पर ज़ाहिर हो,
गौतम जैसे हर शहजादा छोड़ चले।

 

आजादी की चाहत ख़ूँ में उबल पड़े,
कैसा भी राजा हो,प्यादा छोड़ चले।

 

जिस महफ़िल में गए तो हम 'अनमोल' असर,
थोड़ा कम तो थोड़ा ज़्यादा छोड़ चले।।

 

 

 

-करीम पठान 'अनमोल'

 

 

 

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