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Administrator Dr. Srimati Tara Singh









कबीर की शिक्षायें(ग़ज़ल रुप)

 

 

एक ही नूर को अल्लाह-राम बना लिया|
कंकण-पत्थर जोड़कर भगवान बना लिया|

 

 

असत्य अंगीकार व पुरुषार्थ का परित्याग कर,
याचना में उन्नति की राह बना लिया|

 

 

त्यागकर करुणा,दया,उदारता और प्रेम को,
माया-लोभ के तले ईमान झूका लिया||

 

 

सहज समाधि छोड़कय अग्यानता के मोह में,
कहत कबीर जग ने अमर हस्ती मिटा लिया|

 

 

*याचना(मन्दिर-मस्जिद में मन्नतों हेतु भटकना)

-----------विनोद यादव "निर्भय"

 

 

 

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