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Administrator Dr. Srimati Tara Singh









कल सुनी मैंने कहानी आपकी

 

 

कल सुनी मैंने कहानी आपकी,
हो गयी क्या जिंदगानी आपकी।

 

दर्द बन बैठा तखल्लुस आपका,
और मजबूरी निशानी आपकी।

 

नाम तो है आपका भूला हुआ,
शक्ल कुछ कुछ किंतु जानी आपकी।

 

गर्मियाँ आकर कभी की जा चुकीं,
आँख की सूखा न पानी आपकी।

 

कामयाबी मिल सकेगी किस तरह,
आरज़ू है आसमानी आपकी।

 

हादसा यह साथ था मेरे हुआ,
जो सुना मैंने जुबानी आपकी।

 


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-गौरव शुक्ल
मन्योरा

 

 

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