tarasingh
Administrator Dr. Srimati Tara Singh









करते जो ताड़ तिल से

 

 

करते जो ताड़ तिल से.

वेईमां हैँ दिल से.

 

अब जलजले भी देखेँ;

जो देखते थे जल्से.

 

अन्याय जन्मते हैँ ;

अब न्याय के महल से.

 

खुश खेत,खेतिहर हैँ;

अब काग़ज़ी फ़सल से.

 

कुछ बात तब बने जब ;

हो इंक़लाब तल से.

 

तस्वीर और बिगड़ी ;

हर रद्द-ओ-बदल से.

 

बरसेंगे अश्के- ख़ूं भी ;

हर चश्म-ए-ग़ज़ल से.

 

ज़ारी है ज़ंग 'महरूम';

हर ज़ुल्म,सितम, छल से.

 

 

 

देवेन्द्र पाठक 'महरूम'

 

 

HTML Comment Box is loading comments...