tarasingh
Administrator Dr. Srimati Tara Singh









ख्वाब खिलते नहीं पलकों पे गुलाबों की तरह

 

ख्वाब खिलते नहीं पलकों पे गुलाबों की तरह
तश्ना लब रखते हैं आँखों को सराबों की तरह

 

ग़ैर मुमकिन है सुलझ जाये पहेली दिल की
ज़िन्दगी तेरे सवालों के जवाबों की तरह

 

दिल में हर चंद सजाते हैं मुझे लोग मगर
कोई पढता नहीं उर्दू की किताबों की तरह

 

मेरी आवारा मिज़ाजी पे यक़ीं कौन करे
मैं बदल जाता हूँ हर साल निसाबों की तरह

 

सल्तनत तेरी, महल तेरा, हुकूमत तेरी
आ मेरे दिल की रियासत में नवाबों की तरह

 

देखने वाले हैं मदहोश, छुपी हो जैसे
तेरी आँखों में कोई चीज़ शराबों की तरह

 

क्या खबर थी कि तेरे बाद ऐ शाकिर परवीन
दिल पे उतरेंगे तेरे शेर अज़ाबों की तरह।
--

 

 

 

हाशिम रज़ा जलालपुरी

 

 

HTML Comment Box is loading comments...