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कितने अनपढ़ भी हैं देखे कबीर होते हैं

 

 

कितने अनपढ़ भी हैं देखे कबीर होते हैं
ग़रीब लोग भी दिल के अमीर होते हैं।

 

ऐसे बच्चे भी हैं एकलव्य सरीखे यारो
जो , ज़माने के लिए इक नज़ीर होते हैं।

 

कभी घायल नहीं हुए तो आप क्या जानें
हृदय को बेधने वाले भी तीर होते हें।

 

जि‍से भी देखि‍ये वो ऑख मॅूद लेता है
न जाने क्यों हमीं इतने अधीर होते हैं।

 

लीक से हट के चलोगे तो लोग बोलेंगे
लोग सदि‍यों से पीटते लकीर होते हैं ।

 

 

कवि डी एम मिश्र

 

 

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