swargvibha banner

होम रचनाकार कविता गज़ल गीत पुस्तक-समीक्षा कहानी आलेख E-Books

हाइकु शेर मुक्तक व्यंग्य क्षणिकाएं लघु-कथा विविध रचानाएँ आमंत्रित

press news political news paintings awards special edition softwares

 

 

कुछ शब्द मेहमान हैं इस महीने में
और डूबते जाते हैं वो मेरे पसीने में !!
किसी ने कहा आगे सब ठीक होगा
और आ गए कुछ गम इस महीने में !!
गम को गम कहना ज्यादती लगती है
चलो इसे खुशी कहा जाए इस महीने में !!
आ कुछ रंगीन बना देते हैं इन दिनों को
गिनती के तो दिन होते होते हैं महीने में !!
आज तुझको डुबाकर ही दम लूँगा यारब
मैं ख़ुद हूँ ही नहीं"गाफिल"मेरे सफीने में !!
 

 
HTML Comment Box is loading comments...