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लोकतंत्र का महापर्व फिर आया यारों!

 

 

लोकतंत्र का महापर्व फिर आया यारों!
सबने अपना अपना गाना गाया यारों!

 

आलीशान कोठियाँ झोपड़पट्टी पहुँची!,
फिर गरीब को सपना गया दिखाया यारों!

 

धर्म जाति मजहब में बँटी हुई जनता को,
सबने अपने ढँग से खूब भुनाया यारों!

 

पाँच साल पहले के सारे वादे भूले,
नया पुलिंदा वादों का पकड़ाया यारों!

 

खोट प्रजा में है कि तंत्र में ही है खामी,
मकसद अभी न कामयाब हो पाया यारों,

 

इस ने लूटा उस ने लूटा सब ने लूटा,
संविधान का खूब मजाक उड़ाया यारों!

 


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-गौरव शुक्ल
मन्योरा

 

 

 

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