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Administrator Dr. Srimati Tara Singh









मैं और तुम

 

मुट्ठी भर किरणों की बारिश मै और तुम
तुमसे मिलने की एक ख्वाइश मैं और तुम


शबनम के ये कतरे फूल की पत्ती पर
आब है अश्कों का ये मेरे मैं और तुम


पानी पानी अब के भी है सारा कुछ
रोते दिल और बहती आँखें मैं और तुम


पारा पारा अब तो पूरा ज़ामा है
एक उम्मीदों का दामन है मैं और तुम


हंसते लब ये रोते दिल बस हैरानी
बहते पानी की पलकों से मैं और तुम


सीमा है बस ख़्वाब हैं पूरी दुनिया है
ताबीरों पर पहरे पैहम मैं और तुम

 

सीमा गुप्ता

 

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