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Administrator Dr. Srimati Tara Singh









मेरे जैसा कोई..

 

 

merejaisa

 

"मेरे जैसा कोई पागल है क्या,
तेरे जैसी कोई चंचल है क्या,

 

प्यार जितना कि मुझे तुमसे है,
किसी सागर में उतना जल है क्या,

 

आसमाँ पे वो काले बादल हैं,
तेरी आँखों का वो काजल है क्या,

 

तेरे गेसू हैं या के काला जादू,
माह भादो का वो बादल है क्या,

 

महक तेरे बदन की मादक है,
बदन तेरा कोई संदल है क्या,

 

ज़मीं को घेरे आसमाँ दिखता,
तेरा लेहराता वो आँचल है क्या,

 

छनक! जो मौसिक़ी जगाती है,
छनकती वो तेरी पायल है क्या,

 

गिराना बिजलियाँ वो, पलकों से,
इरादा करने का, घायल! है क्या,

 

हदों को तोड़, समन्दर की तरफ़,
बहती कोई नदी, कल-कल है क्या।।"

 

 

 

 

संजय कुमार शर्मा 'राज़'

 

 

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