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Administrator Dr. Srimati Tara Singh









मियाँ तुम शेर हो अगर

 

 

मियाँ तुम शेर हो अगर तो शेर कहो शेर की तरह
सियासी हथकंडे शायरी में यूँ अपनाये नहीं जाते
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गर होता है अन्याय तो आग उगलती है लेखनी
तमगे बेवजह विरोध में यूँ ही लौटाए नहीं जाते
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झुकता है हिन्दोस्ताँ जिसकी याद में अब भी
वो कलाम खुद ही बनते हैं बनाये नहीं जाते
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हो हामीद या भगत शहीद कहलाते हैं जवान
वो हिन्दू या मुसलमान कहलाये नहीं जाते
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हो बशीर या राहत शायरों की है कहाँ कमी
फनकार दुश्मन के घर से बुलवाये नहीं जाते
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अन्धकार मिटाने का तरीका है बड़ा सरल
जलाये जाते हैं चिराग बुझाए नहीं जाते

 

 

 

दीपक पाण्डेय

 

 

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