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Administrator Dr. Srimati Tara Singh









नात

 

 

दिले नादाँ को धड़कने का क़रीना आया
ख्वाब में जब नज़र मुझको मदीना आया

 

आप(स) का नाम लिया मुश्किलें आसान हुईं
ज़द में गिर्दाब के जब मेरा सफीना आया

 

जब भी सर आप(स) की चौखट पे झुकाया मैंने
मेरे पैरों के तले खुल्द का ज़ीना आया

 

अज़मते कौसरो तस्नीम बढ़ाने के लिए
काम माबूद के अहमद(स) का पसीना आया

 

खुम के मैदान में जब आप ने मन कुन्तो कहा
तब शरीयत की अंगूठी में नगीना आया

 

जब लिखी नाते मोहम्मद(स) तो रज़ा मुझको लगा
मेरे हाथों में दो आलम का ख़ज़ीना आया।

 

 

 

हाशिम रज़ा जलालपुरी

 

 

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