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Administrator Dr. Srimati Tara Singh









तुझे पानें कि खातिर होड़ में दौड़ू भला कैसे !!

 

 

सहारा पाक़-दामानी का मैं छोड़ूँ भला कैसे !
ग़ुरुर अपना ख़ुद अपने सामने तोडूँ भला कैसे !!

 

 

बदल कर बिस्तरों को अक्सर ही बिछती रही है जो,
बिना धोये उसी चादर को मैं ओढूँ भला कैसे !!

 

 

जिसे बदनामियों के ख़ौफ़ में जीना लगा आसान,
मैं अपना नाम तक उस नाम से जोडूँ भला कैसे !!

 

 

कटे हैं हाथ मेरे इश्क़ में फूले हुए हैं पाँव,
तुझे पानें कि खातिर होड़ में दौड़ू भला कैसे !!

 

 

 

Lyrics by :- Chandra Shekhar Goswami

 

 

 

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