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Administrator Dr. Srimati Tara Singh









फिर वही बखेडा वही बवाल क्यॊं?

 

 

फिर वही बखेडा वही बवाल क्यॊं?
वही खूँ सॆ सना हुँवा सवाल क्यॊ...?

 

 

फिर हुँवा हूँ शर्मसार आज मै
इन्सान हॊनॆ का मुझॆ मलाल क्यॊं...?

 

 

परॆशान मिट्टी आसमां दॊनॊ यहॉं
दॊनॊंकॆ बिच अपनॆ यॆ दलाल क्यॊं...?

 

 

मैदानॆ जंग सॆ गुजरा तॊ दॆखा यूँ
दॊनॊ तरफ का खूँ था लाल क्यॊं...?

 

 

बच्चॆ कॊ स्कूल आज भॆजू कॆ नही
मॆरॆ दिल मॆं सुबह यॆ खयाल क्यॊं...?

 

 

फिर पुछ रहा है तुझसॆ 'नामालुम'
दहशतगर्द मजहबी ये जाल क्यॊ...?

 

 

 

किशॊर मुगल "नामालुम"

 

 

 

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