ग़ज़ल– सुशील गूरू

जब हमारे गीत रहबर गायेंगे.
आप हमसे रूठकर पछतायेंगे.
दोस्तों का जिक्र जब भी आएगा,
आप सकते में खड़े रह जायेंगे.
हमको है विश्वास दिल की मेड पर,
दीप उल्लासों के फिर जल जाएंगे.
रात भर देखें हैं खुशहाली के ख्वाव,
दिन भी उनकी चाह में कट जायेंगे.
उनकी फितरत है नहीं कहने की कुछ,
हाँ हाँ करते दिन निकलते जायेंगे.

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