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सच बता दो,अब तुम्हारा हमसे नाता कौन है ?

 

 

सच बता दो,अब तुम्हारा हमसे नाता कौन है ?
तुम गये यदि छोड़ तुमको भी बुलाता कौन है?

 

भोंककर के पीठ में छूरा, चलो खुश तो हुये,
वर्ना आकर इस जहाँ में मुस्कुराता कौन है?

 

लाज की परतें उधड़ती जा रही हैं दिन ब दिन,
शर्मदारी का यहाँ , दावा जताता कौन है ?

 

हम करें अभिमान भी तो क्यूँ करें,किस पर करें?
हक जताते हैं सभी , पर काम आता कौन है ?

 

हौसला ये है हमारा ही, हमारी दाद दो,
नाव, वर्ना,आप अपनी ही, डुबाता कौन है ?

 

दोस्त में दुश्मन छिपे हैं , दुश्मनों में दोस्त हैं ,
यह हकीकत है , मगर पहचान पाता कौन है ?

 

एक हम ही हैं कि ढोते फिर रहे हैं , अन्यथा,
लाश अपनी अपने कंधे पर उठाता कौन है ?

 

"वह नदी के तीर पर बैठा हुआ 'गौरव' कहो,
भर उदासी में, विरह के गीत गाता,कौन है ?

 

 

 

गौरव शुक्ल मन्योरा

 

 

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