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Administrator Dr. Srimati Tara Singh









शहर हमारा

 

 

रेवा तट पर बसा जबलपुर, शहर हमारा हमको प्यारा
इसकी मन भावन माटी ने, हमे सवारा हमें निखारा


इसके वातावरण,वायु,जल, नभ ने नित उत्साह बढाया
इसके षिष्ट समाज सरल ने, सदा नेह ममता बरसाया


दृष्य देख इसके बातें सुन, मन ने नये नये स्वप्न सजाये
इससे प्राप्त विषेष ज्ञान ने, पावन विविध विचार जगाये


भरती आल्हाद अनोखे, इसकी मंगल परंपराये
इसकी धार्मिक भावनाओ ने, आराधन के गीत गुजाये


इससे ही बन सका आज मै, जो हूँ साहित्यिक अनुरागी
संवेदी मन मे ज्ञानार्जन की, उत्कंठा प्रीति न त्यागी


इसकी हर हलचल मे दिखता, मुझको एक संसार सुहाना
श्वेत श्याम चट्टानो मे है, भरा प्रकृति का सुखद खजाना


दूर-दूर फैला दिखता है, विध्यांचल का हरित वनाचंल
छाया देता, प्यास बुझाता, सबकी माॅ रेवा का आंचल


जहाँ ज्ञान वैराग्य भक्ति तप, रत है सब शोभित तट वासी
मन वांछित सब सुख सुविधाये, पाते है साधू सन्यासी


षिक्षा और रक्षा के स्थित, कई एक संस्थान उजागर
धर्म प्राण है अधिक निवासी, रेल वायु सुविधाये यहाँ पर


लगता मेरा शहर मुझे प्रिय, अनुपम सब नगरो से ज्यादा
परिवारी स्वजनो से ज्यादा, ममतामय संबंध हमारा


इसकी स्वात्विक रूचि ने ही, संपोषित की मम जीवन धारा
यह ही है पालक पोषक, अनमोल पूज्य प्रिय नगर हमारा

 

 

प्रो सी बी श्रीवास्तव "विदग्ध"

 

 

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