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Administrator Dr. Srimati Tara Singh









शराब छोड़ दी ,तौबा मगर न कर पाये

 

 

"शराब छोड़ दी ,तौबा मगर न कर पाये।
यूँ कि जैसे कोई न जी सके न मर पाये।

 

बड़े बदनाम थे हम वह भी इक जमाना था,
अब जो सुधरे भी तो पूरे कहाँ सुधर पाये।

 

मुबारकें तुम्हें किसी के तुम हुये तो सही,
खरे किसी के भरोसे पे तो उतर पाये।

 

हमारे नाम से पहचान थी तुम्हारी भी,
हम तो भूले, मगर न तुम भी हो अमर पाये।

 

तुमने किस भूलभुलैया में हमको भटकाया,
ढूँढ़ अब तक नहीं हैं हम सही डगर पाये।

 

जिसे अपना बना के छोड़ दे तुम-सा कोई,
तुम्हीं बता दो सुकूँ वह कहाँ किधर पाये।

 

तश्नगी आज भी कायम है पुरानी वाली,
तुम्हारा जलवा नहीं देख नजर भर पाये।"

 


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-गौरव शुक्ल
मन्योरा

 

 

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