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Administrator Dr. Srimati Tara Singh









सुखन के खाली सदफ में गुहर नहीं आता

 

 

सुखन के खाली सदफ में गुहर नहीं आता
मैं चाहता तो बहुत हूँ मगर नहीं आता

 

कोई बताये मुझे दूसरा जहाँ है कहाँ
मुझे सितारों से आगे नज़र नहीं आता

 

मेरा नसीब है बनबास ज़िन्दगी भर का
तो मुझको याद कभी मेरा घर नहीं आता

 

कटाना पड़ता है सर को हुसैन(अस) की सूरत
युँही सिनां की बुलंदी पे सर नहीं आता

 

मेरे गुनाह की मुझ को सज़ा यूँ मिलती है
दुआ तो करता हूँ लेकिन असर नहीं आता

 

मैं ऐक ऐसा मुसाफिर हूँ ऐ रज़ा हाशिम
कि जिसकी राह में एक भी शजर नहीं आता।

 

 

हाशिम रज़ा जलालपुरी

 

 

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