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तरुणाई को चुप कराना चाहता है

 

 

तरुणाई को चुप कराना चाहता है।
इसलिए माफिक बहाना चाहता है।।

 

साथ अपने कर लिए उसने लफंगे।
और अब ताकत दिखाना चाहता है।।

 

गालियों वाली बना ली फौज है जो।
गोलियों वाली बनाना चाहता है।।

 

हम अमन के गीत गाते हैं मगर वो।
नफ़रतों वाला तराना चाहता है।।

 

पाक दामन जो रहे नायक हमारे।
दाग़ दामन में लगाना चाहता है।।

 

वह रहे वाचाल बाकी बेज़ुबाँ हों।
जाने वह कैसा ज़माना चाहता है।।

 

अब अँधेरा हो चला बेहद घना है।
'सिद्ध' इक दीपक जलाना चाहता है।।

 

 

ठाकुर दास 'सिद्ध',

 

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