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Administrator Dr. Srimati Tara Singh









तुम्हारी आँख से पीकर बहकना हम नहीं भूले

 

 

"तुम्हारी आँख से पीकर बहकना हम नहीं भूले,
तुम्हारी बाँह में आकर बिखरना हम नहीं भूले।

 

 

अभी तक दिल पे कायम है मेरे दादागिरी तेरी,
तुम्हारी याद में अब तक तड़पना हम नहीं भूले।

 

 

नहीं आशा कोई बाकी मिलन की,शेष जीवन में,
तुम्हें लेकिन खुदा अपना समझना हम नहीं भूले।

 

 

वो वादे जो किये मंदिर की चौखट पर थे जा जाकर,
उन्हीं वादों से तेरा फिर मुकरना हम नहीं भूले।

 

 

वो किस्तों में निभाई बेवफाई तुमने जो मुझसे,
वो पन्ने रोज पढ़ पढ़कर पलटना हम नहीं भूले।

 

 

तुम्हें अपना समझने की जो गलती कर गये थे हम,
वो गलती याद कर करके सिहरना हम नहीं भूले।

 


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-गौरव शुक्ल
मन्योरा

 

 

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