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Administrator Dr. Srimati Tara Singh









दावा है मेरा उसने उजाले नहीं देखे

 

 

दावा है मेरा उसने उजाले नहीं देखे
जिस शख्स ने ग़ज़लों के रिसाले नहीं देखे


तू मुझको समझ पाए ये मुमकिन भी कहाँ है
तू ने अभी बेनूर उजाले नहीं देखे


तुम भूख पे अशआर अभी कह नहीं सकते
तुमने मेरे पत्थर के निवाले नहीं देखे


जब जी करे खिड़की से उतर आतीं हैं घर में
किरनों ने कभी काँच के ताले नहीं देखे


हर आला नसब आदमी अच्छा नहीं होता
क्या तुमने कबूतर कभी काले नहीं देखे


जो फूट रहे थे किसी मंज़र की चुभन से
तुमने मेरी आँखों के वो छाले नहीं देखे


आवारगी पे मेरे क्यूँ करते हो बहस तुम
तारीख़ में क्या देस निकाले नहीं देखे


जो भी मिला हालात से दो-चार मिला है
"फ़ानी" कभी हालात के पाले नहीं देखे

 

 


फ़ानी जोधपुरी

 

 

 

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