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इकोफ्रेँडली लोकगीत

 

 

पिया मेँहदी लियाय दा मोतीझील से
जाइके साईकील से ना।
पिया मेँहदी लियावा,
छोटी ननदी से पिसावा।
अपने हाँथ से लगावा
काँटा कील से।
जायके साईकील से ना॥

 

 

 

ये अवधी का बहुत ही लोकप्रिय लोकगीत कजरी है। आज करवाचौथ पर भाभियोँ की मनुहार और मेँहदी प्रतियोगिता देखकर याद आ गया ये गीत।
गीत की एक खास बात ये ही कि बहुत इकोफ्रेँडली गीत है। मेँहदी, मोतीझील, साइकिल और काँटाकील आदि पर्यावरण के साथ कितना ताल मेल रखते हैँ।

 

 

 

मनीस पाण्डेय

 

 

 

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