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याद है आज तक पहली वो मुलाकात अपनी

 

 

याद है आज तक पहली वो मुलाकात अपनी।
(1)
निगाह तुझसे जो पहली दफा टकराई थी,
तू मुझे देख के सहमी थी, कुछ शर्माई थी,
अपनी बाँहों में अपने आप सिमट आई थी,

 

लगता है आज भी कल की ही हो वो बात अपनी।
याद है आज तक पहली वो मुलाकात अपनी।
(2)
महक साँसों में आज भी है वो भरी तेरी,
खुमारी आज तक दिल से नहीं उतरी तेरी,
छाप अब भी दिमाग में छपी गहरी तेरी,

 

निकलती रोज है यादों की वो बारात अपनी।
याद है आज तक पहली वो मुलाकात अपनी।
(3)
याद है कैसे धीरे-धीरे हम करीब आए,
किस तरह एक दूसरे के दिलों पर छाए,
घाव एक दूसरे के हमने कैसे सहलाए,

 

फोन पर कैसे मनी थी सुहागरात अपनी।
याद है आज तक पहली वो मुलाकात अपनी।

 


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-गौरव शुक्ल
मन्योरा

 

 

 

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