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डाँ शोभा श्रीवास्तव

 

 

कभी हवाएँ गर्म अौर कभी सावन है।
जीवन क्या है, मौसम का परिवर्तन है।

 

भोर सुनहरी किरणों का मनुहार लगे,
साँझ दमकते दीपों का त्यौहार लगे।
थकी -थकी उम्मीदों में दिखे जोश नया,
कहीं किसी को जीत भी अपनी हार लगे।

 

कहीं भाव उन्मुक्त, कहीं अवगुंठन है,
जीवन क्या है, मौसम का परिवर्तन है।

 

कभी धूप है, पीपल की कभी छाँव है,
पगडंडी से भरा अनोखा ये गाँव है।
रीते गागर वाला है पनघट कभी,
कभी छनकती पायल वाला पाँव है।

 

मन की सुन्दरता का सुन्दर दर्पण है,
जीवन क्या है, मौसम का परिवर्तन है।

 

बहुरंगी फूलों वाला बागीचा है,
खून से अपने हमने जिसको सींचा है।
रिश्तों के धागे से गुंथा है जिसको,
जीवन इक ऎसा मजबूत गलीचा है।

 

प्रेमसुधा पल -पल छलकाता यौवन है,
जीवन क्या बस मौसम का परिवर्तन है।

 

 

 

डाँ शोभा श्रीवास्तव

 

 

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