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निलेश शेवगांवकर "नूर"

 

 

हाइकू

 

 

आपका आना
जगाता है अरमाँ
जाने कितने

हम खो गए
यादों के मौसम में
यक_ब_य़क

 

कैसे सुनूँ मै
दिल की धड़कन
बिन तुम्हारे

 

बदली छाई
यादों का मौसम
साथ में लाई

 

दिल धडके,
बाँई आँख फडके
ना जा लड़ के

 

नहीं मिलता
कोई भी अब मुझे
आपके जैसा

 

सुनी है फिर
मस्जिद की अज़ान
क्या ये तुम हो?

 


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