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बंद दरवाजों के सच

 

 

"आखिर और कितना समय लगेगा डॉक्टर साहब ,सात साल हो गए है मेरी शादी को । लोग हँसते है मुझ पर । आपने जितने भी टेस्ट , दवाइयाँ कही है अब तक मैं बिना लापरवाही करती रही हूँ ......मेरे पति भी अपनी दवाइयाँ समय से लेते है .....फिर भी .....कुछ कीजिये ...." कहते –कहते वीणा फूट-फूटकर रोने लगी ।

"सब्र करो वीणा, तुममे कोई दोष नहीं है । अविनाश जी को सही समय से दवाइयाँ देती रहो । कई बार ऐसे केसेस मे देर लगती है । विश्वास रखो , तुम जरूर माँ बनोगी । "

डाक्टर ज्योति की बातें सुनकर वीणा घर तो आ गयी , पर उसके भीतर की वीणा के तार खंडित हो चुके थे । डाक्टरों से विश्वास उठता जा रहा था और मन का कोमल पौधा सूखने लगा था ।

सात साल पहले अविनाश की दुल्हन बनकर आई थी वो इस घर में , सबकी चहेती बहू थी और आज .....शादी के पहले साल के बाद से ही घर के हर सदस्य की आँखों में बच्चे की इच्छा दिखाई देने लगी थी । धीरे –धीरे समय बीतता गया और आँखों की बातें होंटों से ताने बनकर बाहर आने लगी । परिवार ,रिश्तेदार , पड़ोसी , दोस्त – जिसे देखो , बस एक ही सवाल " अरे भई अब तो फैमिली प्लैनिग छोड़ दो , कोई समस्या है क्या ?" जितने लोग उतने उपाय ....पर नतीजा वही , ढाक के तीन पात । कितने डाक्टर , पंडित, उपवास , यज्ञ .....लेकिन .......कहीं कोई लाभ नज़र नहीं आ रहा था ।

ऐसे में एक दिन वीणा की सास एक बाबाजी को लेकर आई ---------------------------------------------------------
"वीणा ...वीणा ....बाबाजी के चरण छूओ । बाबाजी के आशीर्वाद से कई सूनी गोदे भर गयी है ।

वीणा ने भी तुरंत भाग कर बाबाजी के चरण पकड़ लिए " बाबाजी , मुझ पर भी कृपा कीजिये । मैं कोई भी उपाय करने को तैयार हूँ , आप बस आदेश दीजिये । "

"अवश्य पुत्री , ईश्वर चाहेंगे तो तेरी गोद जरूर हरी होगी । तेरा मस्तक कहता है की तू एक वैभवशाली पुत्र की माँ बनेगी । और पुत्र भी ऐसा जिसके आगे सारा संसार नतमस्तक हो जाएगा , ये वादा है इस सन्यासी का तुझसे । " बाबाजी ध्यान की अवस्था में बोले ।

"सच बाबा , बताइये क्या करना होगा मुझे ?" ऐसी बातें सुनकर वीणा अधीर हो उठी ।

"पुत्री सर्वप्रथम तुझे 40 दिन तक रोज सुबह सूर्य की पहली किरण के साथ स्नान करके संतान प्राप्ति मंत्र का जाप करना होगा , इसमें कुल 50,000 का खर्चा होगा । फिर 41वें दिन तू मेरे आश्रम आएगी , वहाँ तेरा औषधियों द्वारा इलाज़ होगा । इसमें भी तेरा कम से कम 25-30,000 का खर्च होगा , बोल तैयार है इन सब कष्टों के लिए ?"

"हाँ बाबा , मैं हर कष्ट उठाने को तैयार हूँ । पर मैं माँ तो बन जाऊँगी न ?" वीणा जल्दबाज़ी से बोली

"अवश्य , अवश्य पुत्री । अब हम प्रस्थान करेंगे , तुझे सभी बातें मेरी साध्वी समझा देगी । "
वीणा और अविनाश ने कुछ जेवर बेचकर पहला उपाय शुरू कर दिया । दिसंबर की कड़कती सर्दी में भी वीणा ने प्रात काल स्नान और जाप जारी रखा । वीणा की देह पहले से आधी रह गयी थी पर संतान प्राप्ति के मोह ने उसे हर कष्ट के प्रति मजबूत बना दिया था । आखिर 40 दिन पूरे हुए और वीणा सपरिवार बाबाजी के आश्रम जा पहुंची परंतु आगे के इलाज के लिए उन्हे इस बार अपनी जमीन बेचनी पड़ी थी ।

"प्रणाम बाबा , आपका बताया उपाय सम्पूर्ण हुआ अब आगे का मार्ग दर्शन कीजिये । "वीणा ने कहा

" बहुत अच्छे पुत्री , ईश्वर तुझसे प्रसन्न है । वो खुद तेरी झोली भरना चाहता है वरना इतना कठिन जाप करना आसान नहीं । अब तुझे दो दिन यहाँ आश्रम में मेरे औषधि ग्रह में रहना होना । बाकी परिवार प्रस्थान कर जाए और हाँ औषधियों का खर्चा हमारी साध्वी को पहुंचा दिया जाये " बाबाजी मगनावस्था में बोले

"अकेले ....पर बाबाजी ..." वीणा कुछ सकुचाई

" क्या हुआ बहू , बाबाजी भगवान के समान है उनका कोई आदेश मत टालना...कहीं वो रुष्ट हो गए तो ....नहीं नहीं ॥ " तुरंत अविनाश की माँ बीच में बोल पड़ी

"हाँ माँ जी , आप ठीक कह रही है मैं तैयार हूँ । आप निश्चिंत रहिए । "

थोड़ी देर में वीणा की सास और पति चले गए और उसे एक कक्ष में भेज दिया गया । वहाँ उसे हर दो घंटे में कुछ दूध में मिलाकर दिया जाने लगा । रात्रि पहर बाबाजी कक्ष में आए ।

" पुत्री कैसा लग रहा है ?"

" बाबाजी प्रणाम , मैं ठीक हूँ पर कुछ अचेतन सा महसूस हो रहा है । लगता है जैसे मैं होश में भी हूँ और नहीं भी । " वीणा कुछ घबराई सी थी

" कुछ नहीं पुत्री ये औषधियों का असर है । अब हम अगली प्रक्रिया शुरू करेंगे जिसे नियोग कहते है अथार्त योग द्वारा संतान की प्राप्ति ॥" ऐसा कहते ही बाबाजी ने वीणा को पकड़ लिया

" छोड़िए मुझे ये आप क्या कर रहे है ..." वीणा चिल्लाने लगी

" चुप , पहली बात तुझे यहाँ कोई बचाने वाला नहीं और दूसरी बात तेरी सीडी बन रही है अगर बाहर जाकर कुछ भी होशियारी की तो .....बच्चा तो दूर तेरा पति भी तुझे छोड़ देगा " बाबा रूपी भेड़िया चिल्लाया

उसके बाद वीणा चिल्लाती रही , पर नशे की दवाओ के असर के कारण न खुद को बचा पाई और न अपनी इज्जत को ....दो दिन तक यही सब चलता रहा और वीणा नशे की हालत में कुछ भी कर पाने में असमर्थ रही ।

दो दिन बाद जब वो घर जाने लगी तो उसे बाबाजी की साध्वी ने उसकी एक अश्लील सीडी दिखाई और हिदायत दी की बाहर उसका मुंह ना खुलने पाए ।
वीणा घर तो आ गयी पर मानसिक तौर पर खुद को सामान्य नहीं रख पा रही थी । कुछ दिनो बाद उसके गर्भवती होने की ख़बर ने पूरे परिवार को खुशियों से भर दिया था । बाबाजी को ढेरों उपहार भिजवाए जा रहे थे । आने वाले बच्चे के लिए अनगिनत सपने सँजोये जा रहे थे । लेकिन वीणा ------------------------------
अंधविश्वास ने उसका सब कुछ लूट लिया था पैसा , इज्जत और यहाँ तक की अपने और अविनाश के बच्चे तक का सपना । बच्चा तो आ रहा था पर कैसे, किसका और किस क़ीमत पर ----ये कोई नहीं जानता था और वीणा सीडी के डर से ना कुछ बता पा रही थी और ना सह पा रही थी । उसे केवल एक ही रास्ता सूझ रहा था " इस सच को बंद दरवाजे में कैद करने का रास्ता " ॥

 

 

नोट : ईश्वर में आस्था कीजिये पर अंधविश्वास के प्रति सचेत रहिए । ईश्वर के नाम पर लूटने वाले बहुत से रंगे सियार घूम रहे है ।

 

 

संजना अभिषेक तिवारी

 

 

 

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