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My First day at Junior High School

 

 

कक्षा -५ उत्तीर्ण करने के बाद एक - दो महीने इसी जद्दो जहद में निकल गए कि कहां और कौन से स्कूल में दाखिला लूं I अंततः हमारे गांव के सबसे पास के क़स्बे के स्कूल में मेरा दाखिला हो गया , जो गांव से लगभग ४ किलोमीटर दूर था I
जुलाई का महीना लगभग बीत चुका था , मैं अपने मोहल्ले के दो अन्य लडकों के साथ स्कूल जाने के लिए तैयार था I पहली बार इतनी दूर तक पैदल जाना था , अतः हम लोग जल्दी ही घर से निकल गए I रास्ते में प्रसिद्ध '' मक्का बाला बाग़ '' पड़ता था , जिस के बारे में कहा जाता है कि ब्रिटिश राज में यहां फ़ौज की भरती होती थी I मुख्य रास्ते से जुड़ा होने के कारण ब्रिटिश हुकूमत ने यह जगह चुनी थी I
भर्ती का पैमाना केवल शारीरिक कद-काठी ही होती थी , रास्ते से गुजरने बाले लड़कों को पकड़कर नाप-जोख कर उन्हें सीधे ही ट्रेनिंग पर भेज दिया जाता था , घर पर चिठ्ठी या किसी मुलाजिम को भेज कर सूचना दे दी जाती थी I
ये सब बातें मन में चलते - चलते हम लोग भी अपने स्कूल पहुँच चुके थे, हमें देखकर चौकीदार ने आवाज लगाई " अबै तो सफाई बालो नाहीं आओ तुम लोग जल्दी आई अये" I
इस प्रकार हम लोग सबसे पहले स्कूल में पहुँच गये और कक्षा में सबसे आगे बाली ब्रेंच पैर बैठ गए I धीरे - धीरे और छात्रों का आना शुरू हुआ , तभी ३-४ छात्र आये और हम लोगो को से बोले " इस ब्रेंच पर हम लोग बैठते हैं आप लोग पीछे बैठो " I हम लोग उठकर उससे पीछे की ब्रेंच पर बैठ गए , कुछ और छात्र आये हमें उठना पड़ा , झगड़ा न करने की घर से सख्त हिदायत थी , और इस प्रकार हम लोग सबसे पीछे की ब्रेंच पर कोने के पास बैठे हुए थे I
सबसे पहला पीरियड संस्कृत का था , जिसे बेताल सिंह पढ़ाने बाले थे बेताल सिंह दिखने में " बिक्रम- बेताल " सीरियल के बेताल से कम न थे I
पहली घंटी बजने के साथ ही सब लोग हॉरर मूवी के सीन की तरह शांत हो गए और अचानक बेताल सिंह हाथ में मोटा डंडा ले कमरे में आ धमके और आते ही होम वर्क जांचने लगे I गलत होने पर ४ डंडे और करके न लाने पर ८ डंडे I बहाना बनाने पर और पिटाई I सामने हाथ न करने पर पता नहीं कितने डंडे पड़ने बाले थे , इस डर से सभी इस तरह से हाथ आगे कर रहे थे जैसे डंडे न पड़कर लड्डू मिल रहे हों I
हम लोगो का इस स्कूल में पहला दिन था , कितना पढ़ाया जा चुका , क्या होम वर्क मिला है,कुछ पता न था I थोड़ी ही देर में बेताल सिंह बिकराल रूप लेकर हमारे सामने थे जब तक हम कुछ कह पाते , डंडे पड़ चुके थे पूर्व-निर्धारित संख्या में I
पता लगने पर वह बोले बोले " पहले क्यों नहीं बताया " I
पहले पीरियड के बाद लंच से पहले तक सब -कुछ ठीक - ठाक चलता रहा , पिटाई होने के कारण सभी छात्र खामोशी से बैठे हुए थे और उनमे अब लंच के बाद होने बाले गणित के छठे पीरियड का भय सताने लगा I मालूम हुआ गणित टीचर और भी गुस्सैल है I
पहले पीरियड से हम तीनो सह - पाठी सबक ले चुके थे , अतः हम लोगों ने होम वर्क के बारे में पता किया और उसे लंच के समय में पूरा कर लिया I छठे घंटे में फिर वही दृश्य था फर्क इतना था कि फिल्म का हीरो और क्लाइमेक्स बदल गए थे I फिल्म के हीरो थे गणित टीचर - सुरेश चन्द्र और क्लाइमेक्स था केवल हम तीन लड़कों का पिटाई से बचना I
स्कूल में हम लोंगो का पहला दिन है और फिर भी होम वर्क पूरा और सही है , वह और खुश हुए और शाबाशी दी I

आखिरी घंटे में हिंदी का पीरियड था और और उसमे भी लगभग पहले घंटे वाली हालत होने वाली थी I संयोग से सातवाँ घंटा खाली था , मेरे सहपाठियों ने मुझे घेरा हुआ था और मैं अपना होम वर्क करने में लगा हुआ था इस बार सबसे आगे की ब्रेंच पर बैठकर I

 

 

 

Devendra singh shakya

 

 

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