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बस पांच मिनट और ............


शशांक मिश्र ‘भारती’
शिखर और मनु गहरे दोस्त थे। दोनों एक ही विद्यालय में पढ़ते थे। कोई कार्य एक को न आता तो दूसरा मिलकर करवा देता। घर-मुहल्ला हो या विद्यालय हर तरफ दोनों की दौस्ती की चर्चा होती।

घर से स्कूल जाने के लिए साथ-साथ निकलते। यदि थोड़ी सी देर होजाती तो दूसरा इंतजार कर लेता। पर जाते एक साथ ही थे। कभी-कभी शिखर की मम्मी कहा करती-

‘‘क्या बात हुई बेटा, तुम जल्दी तैयार हो तो चले जाओ। वह बाद में आ जाएगा।’

‘नहीं मम्मी, ऐसा नहीं हो सकता; हम लोग साथ-साथ जाएंगे और साथ-साथ ही वापस आयेंगे। शिखर का जबाब होता,

पहले दो-तीन माह तो सब कुछ ठीक-ठाक चला। फिर पता नहीं क्या हुआ, मनु को रोज ही देर हो जाती। समय का उसे बिल्कुल ही ध्यान नहीं था। कई बार तो ग्ह कार्य भी न करता और बहाना बना देता कि समय ही नहीं मिला। इधर शिखर भी अपने दोस्त में हुए इस बदलाव से बहुत दुःखी था। पर क्या करता समझाने सै भी कुछ न हो रहा था। धीरे-धीरे एक आदत और बन गई बस पांच मिनट और........। किसी काम के लिए या कहीं जाने के लिए कहो, मुंह से यही निकलता बस पांच मिनट और। कुछ दिन तक तो शिखर इंतजार कर लेता था।फिर अकेले ही जाना प्रारम्भ कर दिया। हालांकि वह म नही मन में सोचा करता कि कैसे मनु की आदतें सुधरें।

जहां पहले दोनों की दोस्ती की चर्चा होती थी। वहीं अब बस पांच मिनट और की चर्चा होने लगी। जिसे अवसर हाथ लगता वही चिढ़ा देता। कई बार तो मनु भी खीझ जाता। रोनी सी सूरत बना लेता। इधर अर्द्धवार्षिक परीक्षा भी पास आ रहीं थी। सभी बच्चे तैयारी में व्यस्त थे। मनु को तो एक ही बात का ध्यान था, बस पांच मिनट और। परीक्षा प्रारम्भ होने से ठीक एक

दिन पहले आते समय शिखर ने समझा दिया था कि कल समय से उठ जाना नही ंतो परीक्षा छूट जायेगी।

ठीकहै! ठीक है!! ध्यान रखूंगा। ऐसा कहते हुए मनु अपने घर के अंदर चला गया।

शिखर भी अपने घर चला आया। जब अगले दिन शिखर तैयार होकर मनु के घर पहुंचा तो उसकी मम्मी चैंक गईं। उन्होंने पूछा-बेटा इतनी जल्दी कैसे आ गए।’ मनु तो अभी सोकर उठा नहीं है।

क्या, क्या कहा आंटी आपने, आज से तो परीक्षाएं प्रारम्भ हैं? आप कह रही हो कि मनु जगा नहीं। जल्दी से तैयार करो, नही तो आज का पेपर छूट जायेगा। शिखर ने कहा।



बेटा, तुम थोड़ा और रुक जाओ। मैं अभी जाकर जगाती हंूं। मैं करूं भी तो क्या? जब देर रात तक फिल्म देखेगा तो..........।

इधर मनु की मम्मी अंदर गई कि तब तक बस ने हार्न दिया, अब तो शिखर को आना ही पड़ा। वह आकर बस में बैठ गया और बस चल दी।

उधर मनु उठने में आनाकानी कर रहा था, उसका कहना था-अरे मम्मी सोने भी दो ना जोर की नींद लगी है, बस पांच मिनट और। लेकिन आज मम्मी ने उसकी एक न सुनी। उसे उठाकर बैठा दिया। शौचादि दैनिक क्रियाओं से निपटकर उसने नाश्ता किया। उसके बाद तैयार होकर जब बाहर आया देर हो चुकी थी। अब स्कूल के लिए कोई बस नहीं थी। थोड़ी देर प्रतीक्षा की, फिर पैदल ही चल दिया। कुछ दूर धीरे-धीरे चला फिर दौड़ने लगा।

हांफते-हांफते स्कूल पहुंचा तो बहुत देर हो चुकी थी। गेट अंदर से बंद था। कुछ देर बाद प्रधानाचार्य महोदय घूमने आये। उन्होंने मनु को जब गेट के बाहर उदास खड़े देखा तो कड़ी फटकार लगाई। मनु का सिर शर्म से झुक गया। उसकी आंखों में आंसू आ गए।
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कुछ देर बाद परीक्षा समाप्त होने की घंटी बजी। बच्चे बाहर आने लगे। जो आता कहता-बस पांच मिनट और.........। पहले से ही दुःखी मनु अब फूट-फूट कर रोने लगा।

तभी शिखर भी आ गया उससे रहा न गया। मनु को इस तरह रोता देखकर उसकी आंखें भर आयीं। उसने एकांत में ले जाकर पूछा- ‘अरे भइया मनु, पेपर कैसा हुआ, क्यों क्या हुआ? समय पर तो आ गए थे। शिखर ने पूछा,

‘‘कहां पहंुचा दोस्त, कोई बस न थी। दौड़ भी लगाई पर समय से न पहुंच सका।’’ मनु बोला,

‘तो इतने दुःखी क्यों हो रहे हो?’ शिखर ने कहा,

दुःखी न होऊं तो क्या करूं। पहले प्रधानाचार्य जी ने डांटा, अब बच्चे चिढ़ा रहे हैं। घर पर मम्मी-पापा भी डांटेंगे। मनु ने रोते हुए कहा,

गलती होने पर सभी को हंसी उड़ाने का अवसर मिलता है। तुम चिंता न करो, घर पर आंटी-अंकल को मैं समझा दूंगा। रही पीरक्षा की बात तो एक ही पेपर तो छुटा है। अभी सुधरने से सब ठीक हो सकता है। चलो घर चलते हैं। मनु को समझाते हुए शिखर ने कहा।

उसके के बाद मनु और शिखर अपने-अपने घर आ गये। शिखर के समझा देने से मनु की डांट भी बच गई। अब मनु धीरे-धरे अपनी आउतों में सुधार करने लगा। उसने देर रात तक फिल्म देखना छोड़ दिया। एक-दो मनोरंजन और ज्ञानबर्धक कार्यक्रम ही देखता। सुबह को जल्दी उठने से समय भी मिलने लगा। अब बस पांच मिनट और की आदत भी छूट गई।

पापा-मम्मी के उत्साह बढ़ाने से पढ़ाई-लिखाई में भी पूरा ध्यान देने लगा। धीरे-धीरे वार्षिक परीक्षाओं का समय भी आ गया।

इस बार मनु शिखर को बुलाने गया था। दोनों के पेपर अच्छे हुए। वह दिन भी आ गया, जिसकी सभी को प्रतीक्षा थी। विद्यालय का परीक्षाफल घोषित हुआ। दोनों ही प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुए।

परीक्षाफल लेकर जब घर पहुंचे तो मनु की मम्मी दरवाजे पर ही प्रतीक्षा करती मिली। देखते ही बोली-
‘बच्चों कैसा रहा परीक्षाफल!,

-‘मनु कोई उत्तर देता उससे पहले ही शिखर बोल पड़ा- बस पांच मिनट और.......।’

मनु चिढ़ते हुए अपनी मम्मी से जाकर लिपट गया। मम्मी सब समझ गईं। दोनों को अंदर ले जाकर मिठाई खिलाई। उसके बाद शिखर खुशी-खुशी अपने घर आ गया।

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