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vinti................ek prarthana

 

मन्दिर मसजिद और गुरुद्वारों में,
इक विनती करूँ तेरे सब द्वारों पर !
कब से सोया मेरा यार जगा दो..
ये अरज हमारी पूरण कर दो...
उम्मीद किरण को सूरज कर दो..
कथा कहानी मे सार जगा दो...
कब से सोया मेरा यार जगा दो
सपने सारे अभी अधूरे...
कितने प्यारे सभी अधूरे..
विकट विथा में अजेय बना दो..
काली रातो मे अभय बना दो..
दिलों दिलों का मेरा यार जगा दो..

 

सुना तो हमने भी है....
खड़ा किया हर गिरने वालों को तुमने,
कितनों को जीना सिखलाया तुमने,
मध्यम दीपक का तेज बढ़ाया तुमने ,
और कितनो को उठना सिखलाया तुमने,

 

कब से सोया मेरा यार जगा दो.............
हम सब का यार जगा दो....
मेरी महफ़िल का दिलदार जगा दो.
यही अरज हमारी पूरी कर दो.....

 

 

Anand Murthy

 

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