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आदमी

 

 

मानव
एक पथिक है।
चलता है अपनी मंजिल की ओर-
धूप में, छांव मे
अंधेरे में, प्रकाश में।
वह-
तलाशता है
छांव, किरण, पेड़ और जल।
इन्हीें के सहारे वह
अपनी मंजिल तक पहुंचता है।।
आदमी-
जो मानव है
चाहता है प्यार-स्नेह
आश्वासन और सान्त्वना।
आदमी-
जब अकेलापन महसूस
करता है तब-
अपनों की तस्वीरों
के सहारे जीने का प्रयास
करता है।
आदमी-
मित्रों से अपेक्षा करता है-
आश्वासन, सान्त्वना
और प्यार-दुलार, और
उत्साह वर्धन की।
आदमी-
इन्हींे सबको देख/महसूस कर
बन जाता है धैर्यवान।
और अपनी
मंजिल तक आसानी से
पहुंच जाता है।
यह सब पाने के लिए सभीं
को मानव बनना पड़ेगा।
तभीं-
प्यार-दुलार, आश्वासन
जैसे जिन्दगी जीने के सहारे
प्राप्त हो सकेंगे।।।

 

 

 

-डॉ. भूपेन्द्र सिंह गर्गवंशी

 

 

 

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