tarasingh
Administrator Dr. Srimati Tara Singh


www.swargvibha.in






आत्महत्या

 

 

बेलुत्फ जिंदगी में मैं जिन्दा हूँ ये सोचकर,
कहीं मेरी कायराना हरकत पर,
सियासत न शुरू हो जाए।
मेरी जाति और धर्म जो मेरे नाम से भी नहीं जुड़े,
कहीं उसकी खबर पुरे देश को न लग जाए।
कहीं मेरी लाश पर बैठकर
सियासतगार देश को दलित-गैर दलित में
बांटने का काम न करने लगें।
कहीं मुझे नेता दलित, पिछड़ा, गरीब किसान या मुसलमान कहकर मेरी बुजदिली को शहादत का नाम देकर देश के बहादुर सैनिकों का अपमान न कर दे।
कहीं मेरा परिवार, मेरे दोस्त मेरी मौत पर रो ना पड़े।
कहीं मेरे चाहने वालों की खुशहाल जिंदगी,
मेरी मौत से ग़मगीन ना हो जाए।
कहीं मेरी माँ की जिंदगी इस सदमे से नरक से भी बदतर न हो जाए।
बेलुत्फ जिंदगी में मैं जिंदा हूँ ये सोचकर,
जिंदगी का बुरा दौर यक़ीनन बदलेगा,
जिंदगी यक़ीनन नई खुशियाँ लेकर आएगी।
मैं मुश्किलों से लड़ूंगा और जीत कर दिखाऊंगा।

 



जय हिन्द, जय भीम
©डीजे

 

कवि परिचय
नाम-दिनेश कुमार 'डीजे'

 

 

 

HTML Comment Box is loading comments...