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अपने भी ये देखा होगा..., है ना ?

 

टॉम-जेरी के खेल सभी को भाते हैं
ज़िंदगी और मौत ऐसे ही लुभाते हैं

 

एक की मार से दूसरा बचता है,
जीत के लिए बड़ी जुगत लगाते हैं ।

 

मासूम मौत को ज़िन्दगी के तमाशे,
एक नहीं कई लगातार दिखाते हैं ।

 

होती छीना-झपटी ही दोनों में अक्सर !
आखिर में किस्से सुलझ ही जाते हैं ।

 

सारा ये खेल हैं हमारे जीवन के !
हँसने-रोने के एपिसोड कई आते हैं ।

 

समझता नहीं इन्सान इस खेल को,
दाँव एक नहीं कई तरह से लगाते हैं ।

 

 

अनुराग त्रिवेदी ...'एहसास'

 

 

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